विद्यालय का संक्षिप्त इतिहास
सशस्त्र सेना छावनी बोर्ड हाई स्कूल योल कैंट का प्रारंभ 15 सितम्बर 1954 को हुआ। इस तिथि से पहले यहाँ निजी गैर सरकारी संस्था के इलावा कोई ऐसा विद्यालय नहीं था जो असैनिक और सैनिक कर्मचारी वर्ग के बच्चों की शिक्षा सम्बन्धी आवश्यकता को पूरा कर पता।
राष्ट्रीय माध्यमिक विद्यालय, राज्य शिक्षण प्राधिकरण द्वारा निर्धारित स्तर को पूरा करने में सक्षम नहीं था। उन्होंने छावनी बोर्ड खास योल से इसका कार्यभार सँभालने और सिक्षा विभाग और लोगों की आवश्यकता के अनुसार इसे चलने की याचना की। इस निवेदन पर सेना और छावनी बोर्ड के अधिकारीयों ने राष्ट्रीय माध्यमक विद्यालय का कार्यभार सँभालने का प्रस्ताव पास किया। 15 सितम्बर 1954 को छावनी बोर्ड ने इसका कार्यभार संभाला और इसे सशस्त्र सेना छावनी बोर्ड उच्च विद्यालय का नाम दिया। राज्य सिक्षा प्राधिकरण के मान्यता प्राप्त करने हेतु इसने शुरू से ही उच्च विद्यालय के रूप में कार्य करना शुरू कर दिया।
14 मई 1955, को लेफ्टिनेंट जनरल यादवेन्द्र सिंह जी राजप्रमुख पेप्सू ने इसका उद्घाटन किया और ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह कमांडर 81 ब्रिगेड को छावनी बोर्ड खास योल का अध्यक्ष होने के नाते उन्हें पहला सभापति अध्यक्ष बनाया गया। 1970 तक सात मील के दायरे तक छावनी बोर्ड ही एक मात्र विद्यालय था और यहाँ दूर दराज स्थानों से छात्र सिक्षा प्राप्त करने आते थे।
राज्य सिक्षा प्राधिकरण ने 1955 में इसे सबसे पहले अस्थाई मान्यत दी और बाद में वर्ष 1959 में इसे सतही रूप से मान्यता प्रदान कर दी।
शिक्षण कर्मचारी वर्ग : विद्यालय में अध्यापकों के 30 स्वीकृत उब हैं जिसमें से 7 पद रिक्त हैं।
गैर शिक्षण कर्मचारी वर्ग : इस वर्ग में 5 पद गैर शिक्षण करमचारियों के लिए रखे गए हैं।
मान्यता/सम्बधता/कार्यकारी समय: छावनी बोर्ड विद्यालय को हिमाचल सिक्षा बोर्ड द्वारा स्थाई सम्बधता और हिमाचल प्रदेश राज्य सरकार द्वारा इसे मान्यता दी गयी है। विद्यालय का कार्यकारी समय सुबह ९ बजे से ३ बजे तक है।
शुल्क: विद्यालय में छात्रों की फीस नामात्र है।
विद्यालय में दाखिला लेने हेतु : विद्यालय में कोई भी व्यक्ति मुख्याध्यापक से दाखिले की प्रार्थना पत्र लेकर अपने बच्चे को दाखिला करवा सकता है। इस विद्यालय में पढ़ाई के अलावा कंप्यूटर सिक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी प्रोत्साहन दिया जाता है।
शिकायतें : विद्यालय की कार्य प्रणाली से सम्बंधित कोई भी शिकायत मुख्याध्यापक के पास की जा सकती है। अगर आपको संतोषजनक जवाब नहीं मिलता तो आप छावनी बोर्ड अधिकारी से सम्पर्क कर सकते हैं।
नागरिकों का उत्तरदायित्व : जिस अभिभावकों के बच्चे छावनी बोर्ड में पढ़ने हैं उन्हें स्कूल की गतिविधियों में अपना सहयोग देना चाहिए। उन्हें बच्चे के विकास में अपनी भागीदारी प्रदर्शिक करनी चाहिए और विद्यालय प्रशासन को नियमित अपने सुझाव देने चाहिए।