खास योल छावनी के बारे में
छावनी परिषद् खास योल द्वितीय वर्ग छावनी है। यह एक आश्रित छावनी बोर्ड है जिसके अपने बहुत कम आये स्रोत हैं और सहायता अनुदान पर निर्भर है। खास योल छावनी परिषद् द्वित्य विशव युद्ध के कैदियों को आश्रय देने के लिए 1942 में अस्तित्व में आया। अगस्त 1958 तक 3 सदस्य बैरिड बोर्ड (अर्थात चुने हुए सदस्यों के बिना) छावनी अधिनियम 1924 की धारा 12 (अब छावनी अधिनियम 2006 की धारा 13) के अंतर्गत कार्य करना शुरू हुआ। इस छावनी के प्रथम आम चुनाव 1958 में हुए थे और बैरिड बोर्ड के द्वितीय (सी) वर्ग मैं बदला गया था। यद्यपि वर्ष 1974 में जनसँख्या के बढ़ने से परिषद् का स्तर बढ़ कर वर्ग 2(ए) हो गया और चुने हुए सदस्यों की संख्या 4 से 6 हो गई। अंतिम 2001 की जनसँख्या के अनुसार और छावनी अधिनियम 2006 के अस्तित्व में आने पर इस परिषद् का स्तर बढ़कर वर्ग 2 हो गया, चुने हुए सदस्यों की संख्या 6 से 7 हो गई।
स्थिति क्षेत्र और जनसंख्या
छावनी परिषद खास योल एक पहाड़ी छावनी है जो की समुन्दर तल से 3500 से 4200 फुट तक ऊपर स्थित है और हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के मुख्यालय धर्मशाला से 8 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है।
छावनी का क्षेत्र 1535 एकड़ है जिसके सात गाँव है इसकी जनसंख्या 2001 की जनगणना के अनुसार 10772 है। जिसमे अनुसूचित जाति के व्यक्ति भी है छावनी क्षेत्र मध्य में 771 एकड़ है तथा शेष क्षेत्र या निजी भूमि है या शामलात भूमि (राज्य सरकार की भूमि) है |
सविंधान
छावनी परिषद योल वर्ग-2 छावनी है और जिसके 14 सदस्य है स्टेशन का कमान अधिकारी परिषद का अध्यक्ष है और एस ई एम ओ और जी ई (अधिशाषी सदस्य) मुख्य अधिशाषी अधिकारी और अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी (जिला दण्डाधिकारी द्वारा मनोनीत) पदासीन सदस्य है | दो सैनिक सदस्य जो स्टेशन के कमान अधिकारी द्वारा मनोनीत किये गए है वह परिषद् के मनोनीत सदस्य होते है | इसके अतिरिक्त छावनी बोर्ड को जिन सात वार्डो में बांटा गया है उनके सात नागरिक सदस्य भी होते है जो व्यसक मताधिकार द्वारा चुने जाते है | उपाध्यक्ष चुने गए सदस्यों द्वारा आपस में से चुना जाता है | इसलिए परिषद् 14 सदस्य है | मुख्य अधिशाषी अधिकारी को रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत रक्षा संपदा सेवाओं से केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है जो की परिषद् के सदस्य सचिव का कार्य करते है |